छठ पूजा क्यों मनाया जाता है? Chhath Puja कब व कैसे मनाया जाता है? जानिए

Hello दोस्तों, आप ये पोस्ट पढ़ रहे हो तो, इस post में हम जनाएगे छठ पूजा के बारे में जैसे की छठ पूजा क्यों, कब और कैसे मनाया जाता है?. इस तोहार का क्या है महत्व।

Chhath Puja इसे “छठ, सूर्य व्रत, छठी माई के पूजा, छठ पर्व, डाला छठ, डाला पूजा” भी कहा जाता है| यह एक हिन्दू पर्व है, जो मुख्य रूप से Bihar, Jharkhand, Eastern Uttar Pradesh and Nepal में मनाया जाता है।

इस के साथ ही Bihar, Jharkhand, UP के लोग जो भारत के दूसरे शहरो में और इंडिया से बहार रह रहे है वो भी छठा पूजा वही मनाते है.

छठ पूजा क्यों मनाया जाता है? – इस की शुरुआत कैसे हुई!. (When is Chhath Puja celebrated? – How it started!)

देव माता अदिति ने की व्रत

मान्यता है की God Mata अदिति ने की थी Chhath पूजा। एक कथा के अनुसार प्रथम देवासुर संग्राम में जब असुरों से देवता हार गये थे, तब देव माता Aditi ने पुत्र प्राप्ति के लिए देवारण्य के देव सूर्य मंदिर में Chhathi Maiya की पूजा अर्चना की थी। तब प्रसन्न होकर, Chhathi Maiya ने अदिति माता को सर्वगुण संपन्न तेजस्वी पुत्र होने का वरदान दिया था. इसके बाद Aditi के पुत्र हुए त्रिदेव रूप Aditya Bhagwan. जिसने असुरों पर देवताओं को विजय दिलाई। कहते हैं कि उसी समय से देव सेना षष्ठी देवी के नाम पर इस का नाम देव हो गया और Chhath Puja का चलन भी शुरू हो गया।

माता सीता ने भी रखा छठ व्रत

इसके अलावा, एक और कथा प्रचलित है। इसके अनुसार, यह माना जाता है कि माता सीता ने भी सूर्य देव की पूजा की थी। माता सीता, राम और लक्ष्मण जब 14 वर्ष का वनवास काट कर लौटे थे, तब सीता जी ने इस व्रत को किया था। माता सीता ने सरयू नदी के तट पर अपने पारिवारिक देवता सूर्य की पूजा पूरी बिधि के पूर्वक उपवास रखा और स्थापित सूर्य की पूजा की। यह तिथि कार्तिक शुक्ल की षष्ठी थी। अपने राजा को देखकर अयोध्या की प्रजा ने भी यह पूजन आरंभ कर दिया। तब से छठ पूजा की प्रथा शुरू हुई।

द्रोपदी में भी रखा था छठ व्रत

छठ पर्व से जुड़ी एक और कहानी प्रचलित है कि जब पांडव अपना सारा राजपाठ हार गए और 12 साल के वनवास जाना पड़ा था, तब द्रोपदी ने छठ व्रत रख कर पांडवों को उनका सारा राजपाठ वापस दिलाने के लिए पूजा किया था।

छठ पूजा कब मनाया जाता है? (When is Chhath Puja celebrated?)

  • Diwali के छठे दिन से शुरू होता है छठ का पर्व, और ये चार दिनों तक चलता है।
  • कार्तिक महीने में मनाया जाता है ये पर्व, इसकी शुरुआत कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को तथा समाप्ति कार्तिक शुक्ल सप्तमी को होती है.

छठ पूजा कैसे मनाया जाता है? (How is Chhath Puja celebrated?)

Diwali के 6 Day से शुरू होने वाला ये पर्व, अलगतार चार दिनों तक चलता है। इसकी शुरुआत कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को तथा समाप्ति कार्तिक शुक्ल सप्तमी को होती है| यह व्रत लगातार 36 घंटे तक चलता है| इस दौरान व्रतधारी अन्न और पानी ग्रहण नहीं करते।

  • नहाय खाय – व्रत का पहला दिन.

Chhath Puja का पहला दिन जिसे ‘नहाय-खाय’ कहते है, सबसे पहले घर की सफाई कर उसे पवित्र किया जाता है। उसके बाद व्रती गंगा नदी,गंगा की सहायक नदी, तालाब  में जाकर या अपने सभी के अनुसार चपे पर स्नान करते है। साथ ही वो अपने नाखनू वगैरह को अच्छी तरह काटकर साफ कर लेते है। व्रती इस दिन सिर्फ 1 बार ही खाना खाते है ।

खाना में व्रती कद्दू की सब्जी (Kadu Ki Sabji), मुंग चना दाल (Mug Chana Dal), चावल (Rice) कहते है. यह खाना कांसे, मिट्टी या कोई साफ़ बर्तन में पकाया जाता है। खाना पकाने के लिए आम की लकड़ी और मिटटी के चूल्हे का इस्तेमाल किया जाता है। जब खाना बन जाता है तो सबसे पहले व्रती खाना खाते है, उसके बाद परिवार के लोग खाना खाते है।

  • खरना – व्रत का दूसरा दिन.

छठ पर्व का दूसरा दिन जिसे खरना कहते है, इस दिन व्रती पुरे दिन उपवास रखते है. शाम को चावल गुड़ और दूध का खीर और गेहूं की आटा के रोटी बनाया जाता है। खाना में नमक (Solt) और चीनी (sugar) का प्रयोग नहीं किया जाता है। खीर, रोटी और सभी प्रकार के फल से सूर्यदेव को नैवैद्य देकर उसी घर में एकान्त रहकर उसे ग्रहण करते हैं। उस के बाद, व्रती खाकर अपने सभी परिवार, मित्रों और  रिश्तेदारों को वही ‘खीर, रोटी, फल’ का प्रसाद खिलाते हैं। इस सम्पूर्ण प्रक्रिया को ‘खरना’ कहते हैं। इसके बाद व्रती अगले 36 घंटों के लिए निर्जला व्रत रखते है।

  • संध्या अर्घ्य (सझिया घाटे) – व्रत का तीसरा दिन.

छठ पर्व का तीसरा दिन जिसे संध्या अर्घ्य और सझिया घाटे भी कहते है| पुरे दिन सभी लोग मिलकर पूजा की तैयारिया करते है। छठ पूजा के लिए विशेष प्रसाद जैसे ठेकुआ (खजुरी), Sathi के चावल के लड्डू (कसार) बनाया जाता है। छठ पूजा के लिए एक बड़ा बांस की बनी हुयी दउरा में, छोटी-छोटी डाली, अर्घौती या सूप में ठेकुआ, नारियल, पांच प्रकार के फल और पूजा का अन्य सामान को दउरा में रख कर. उसे नई या साफ कपड़ा से ढक कर घर के लोग उसे घाट पे ले जाता है।

Chhath Ghat की तरफ जाते हुए रास्ते में महिलाये छठ का गीत गाते हुए जाती है| नदी या तालाब के किनारे जाकर महिलाये घर के किसी सदस्य या गांव के लोग  द्वारा बनाये गए घाट के चबूतरे पर बैठती है। नदी से मिटटी से छठी मैया का जो चौरा (श्रीसाप्ता) बना रहता है उस पर पूजा का सारा सामान रखकर नारियल चढाते है|

सूर्यास्त से कुछ समय पहले सूर्य देव की पूजा का सारा सामान लेकर घुटने भर पानी में जाकर खड़े हो जाते है और डूबते हुए सूर्य देव (drowning Sun God) को अर्घ्य देकर पांच बार परिक्रमा करते है। डूबते हुए सूर्य देव के पूजा करने के बाद कुछ लोग दउरा लेकर घर आपस आ जाते है, वही कुछ लोग रात को घाट पे रुकते है|

  • उषा अर्घ्य (बिनहिया घाटे) – व्रत का चौथा दिन.

उषा अर्घ्य (बिनहिया घाटे) करते है, ये व्रत का चौथा और अंतिंम होता है. सूर्योदय से पहले ही व्रती लोग घाट पर उगते सूर्यदेव की पूजा हेतु पहुंच जाते हैं। संध्या अर्घ्य में अर्पित पकवानों को नए पकवानों से बदल दिया जाता है, परन्तु कन्द, मूल, फल वही रहते हैं। उषा अर्घ्य (Usha arghya) के सभी नियम-विधान सांध्य अर्घ्य (Evening arghya) की तरह ही होते हैं। सिर्फ व्रती लोग इस समय पूरब की ओर मुंहकर पानी में खड़े होते हैं व सूर्योपासना करते हैं। पूजा-अर्चना समाप्त होने के बाद घाट का पूजन होता है।

वहाँ उपस्थित सभी लोगों में प्रसाद वितरण करके व्रती घर आ जाते हैं, और घर पर भी अपने सभी परिवार के लोगो को प्रसाद वितरण करते हैं। वृत्ति घर वापस आकर गांव के पीपल के पेड़ जिसको ब्रह्म बाबा कहते, और गांव के सभी मंदिर में भी जाकर पूजा करते है। पूजा के पश्चात् व्रति कच्चे दूध या चीनी पानी का शरबत पीकर तथा थोड़ा प्रसाद खाकर व्रत पूर्ण करते हैं, जिसे पारण या परना कहते हैं। व्रती लोग खरना के दिन के बाद निर्जला उपवासोपरान्त आज सुबह ही नमकयुक्त भोजन करते हैं।

छठ पूजा हैं बिहारवासियों की पहचान! (Chhath Puja is the identity of Biharis!)

Chhath Puja को देश के कई हिस्सों में बिहार, Jharkhand और Uttar Pradesh से आये उत्तर भारतीय आर्य लोगों की पहचान के रूप में देखा जाता रहा है।

छठ पूजा 2020 / 2021 – कब है छठपूजा तिथि व पूजा मुहूर्त।

छठ पूजा 2020

1.    नहाय खाय – व्रत का पहला दिन

बुधवार, 18th नवंबर 2020

सूर्योदय – 06:46 AM

सूर्यास्त – 05:26 PM

3.    खरना – व्रत का दूसरा दिन.

गुरूवार, 19th नवंबर 2020

सूर्योदय – 06:47 AM

सूर्यास्त – 05:26 PM

3.    संध्या अर्घ्य (सझिया घाटे) – व्रत का तीसरा दिन.

शुक्रवार, 20th नवंबर 2020

छठ पूजा के दिन सूर्योदय – 06:48 AM

छठ पूजा के दिन सूर्यास्त – 05:26 PM

4.    उषा अर्घ्य (बिनहिया घाटे) – व्रत का चौथा दिन.

शनिवार, 21st नवंबर 2020

सूर्योदय – 06:49 AM

सूर्यास्त – 05:25 PM

छठ पूजा 2021

1.    नहाय खाय – व्रत का पहला दिन

सोमवार, 8th नवंबर 2021

सूर्योदय – 06:46 AM

सूर्यास्त – 05:26 PM

2.    खरना – व्रत का दूसरा दिन.

मंगलवार, 9th नवंबर 2021

सूर्योदय – 06:47 AM

सूर्यास्त – 05:26 PM

3.    संध्या अर्घ्य (सझिया घाटे) – व्रत का तीसरा दिन.

बुधवार, 10th नवंबर 2021

छठ पूजा के दिन सूर्योदय – 06:48 AM

छठ पूजा के दिन सूर्यास्त – 05:26 PM

4.    उषा अर्घ्य (बिनहिया घाटे) – व्रत का चौथा दिन.

गुरूवार, 11st नवंबर 2021

सूर्योदय – 06:49 AM

सूर्यास्त – 05:25 PM

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